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जोधपुर हाईकोर्ट का गुंबद ढहने के खतरे में, IIT मुंबई रिपोर्ट में खामियां उजागर

Briovo· 12 Aug 2026, 08:31 pm IST
जोधपुर हाईकोर्ट का गुंबद ढहने के खतरे में, IIT मुंबई रिपोर्ट में खामियां उजागर

आईआईटी मुंबई की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग का 21 मीटर ऊंचा केंद्रीय गुंबद ढहने के खतरे में है। कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य सरकार व संबंधित एजेंसियों को तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्देश दिया है। इससे पहले, आईआईटी जोधपुर की रिपोर्ट में भी स्टील में जंग और कंक्रीट में दरारें जैसे मुद्दे सामने आए थे। मुख्य सचिव और डीजीपी सहित अधिकारियों को 24 अगस्त को अदालत में पेश होकर कार्रवाई योजना और जवाबदेही का विवरण देने वाले हलफनामे के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। कुछ ही साल पहले बनी इस इमारत में पानी के रिसाव और अग्नि सुरक्षा की कमियों सहित गंभीर संरचनात्मक खामियां देखी गई हैं।

AI सारांश

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गुंबद ढहने का खतरा

आईआईटी मुंबई की एक रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग का 21 मीटर ऊंचा केंद्रीय गुंबद ढहने का खतरा झेल रहा है। इस गंभीर आकलन ने सार्वजनिक इमारत की संरचनात्मक अखंडता के बारे में तत्काल चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट में गंभीर कमियों पर प्रकाश डाला गया है जो इमारत के रहने वालों की सुरक्षा से समझौता कर सकती हैं।

अदालत ने संज्ञान लिया

चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद, जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस मुद्दे का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से तत्काल कार्रवाई और जवाबदेही की मांग करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। यह सक्रिय कदम संरचनात्मक खामियों को दूर करने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।

पिछले ऑडिट और खामियां

कुछ ही साल पहले बनी इस इमारत में खामियां नई नहीं थीं; आईआईटी जोधपुर के एक ऑडिट में पहले भी स्टील में जंग, कंक्रीट में दरारें और वॉटरप्रूफिंग संबंधी समस्याएं पाई गई थीं। एक संरचनात्मक ऑडिट ने खराब निर्माण गुणवत्ता और उपयोग किए गए पानी में अत्यधिक क्लोराइड का भी खुलासा किया था। ये बार-बार सामने आ रहे मुद्दे निर्माण और रखरखाव में गहरी प्रणालीगत समस्याओं की ओर इशारा करते हैं।

तत्काल निर्देश और समन

उच्च न्यायालय ने गुंबद क्षेत्र को बैरिकेड करने, सीपेज की समस्याओं को ठीक करने और 24 घंटे संरचनात्मक निगरानी लागू करने सहित विशिष्ट उपाय करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी सचिव, वित्त सचिव, आरएसआरडीसी के एमडी और डीजीपी सहित प्रमुख अधिकारियों को 24 अगस्त को अदालत में पेश होने के लिए बुलाया गया है। उन्हें कार्रवाई योजना और जिम्मेदार पक्षों का विवरण देते हुए एक हलफनामा प्रस्तुत करना होगा।

वित्तीय निहितार्थ

पहले के आकलन के आधार पर, इमारत की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग की अनुमानित लागत लगभग ₹57.65 करोड़ है। यह महत्वपूर्ण व्यय गंभीर निर्माण त्रुटियों को सुधारने के वित्तीय बोझ को उजागर करता है। अदालत के निर्देशों का उद्देश्य न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि इन पर्याप्त लागतों के लिए जवाबदेही भी तय करना है।

क्यों मायने रखता है

उच्च न्यायालय भवन के गुंबद के संभावित ढहने से न्यायिक कर्मियों, वादियों और जनता के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा होता है, जो सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता और निरीक्षण में गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। यह संरचनात्मक ऑडिट और जवाबदेही की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है।

मुख्य तथ्य

  • Building Component at Risk: 21-meter high Central Dome of Rajasthan High Court, Jodhpur
  • Source of Collapse Threat: IIT Mumbai report findings
  • Court Action: Suo motu cognizance, ordered immediate safety measures
  • Officials Summoned: Chief Secretary, PWD Secretary, Finance Secretary, RSRDC MD, DGP
  • Hearing Date: August 24, 2023
  • Estimated Repair Cost: ₹57.65 crore (based on prior IIT Jodhpur audit)

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