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फिरोजाबाद में मासूम के हत्यारे को मौत की सजा

Briovo· 18 Jul 2026, 03:23 pm IST
फिरोजाबाद में मासूम के हत्यारे को मौत की सजा

फिरोजाबाद कोर्ट ने मई में 18 महीने के मासूम आरव की क्रूर हत्या के मामले में विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा सुनाई है। विराज ने कथित तौर पर इस बच्चे को अपनी शादी में बाधा माना था और उसकी हत्या कर दी थी। मुकदमे की सुनवाई तेजी से हुई, घटना के 40 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया और फैसला सुनाया गया। इस मामले में 13 अभियोजन गवाह शामिल थे और यह उत्तर प्रदेश में त्वरित कानूनी प्रक्रिया को दर्शाता है। सजा सुनने के बाद विराज ने कथित तौर पर खुद को थप्पड़ मारा।

AI सारांश

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फिरोजाबाद में त्वरित न्याय

फिरोजाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने 18 महीने के बच्चे आरव की हत्या के मामले में विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला मई में हुई घटना के सिर्फ 40 दिनों के भीतर सुनाया गया, जो एक त्वरित कानूनी प्रक्रिया को दर्शाता है।

जघन्य अपराध के पीछे का मकसद

विराज को मासूम आरव की क्रूर हत्या का दोषी पाया गया, जिसे उसने कथित तौर पर बच्चे की मां से शादी करने की अपनी मंशा में बाधा माना था। आरोपी कथित तौर पर बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने ले गया था और फिर उसे सड़क पर पटक कर घातक रूप से मार डाला।

त्वरित पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया

इस मामले में जांच और अभियोजन असाधारण गति से चला। पुलिस ने हत्या के छह दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया, जिससे 40 दिनों में मुकदमे की सुनवाई पूरी हो गई। लोक अभियोजक राजीव प्रियदर्शी ने 13 अभियोजन गवाहों की जांच के साथ इस दक्षता पर प्रकाश डाला।

जन आक्रोश और गिरफ्तारी

क्रूर हमले के कुछ हिस्से सीसीटीवी में कैद हो गए थे, जिसके फुटेज ऑनलाइन प्रसारित होने के बाद व्यापक जन आक्रोश फैल गया। घटना के बाद, विराज फरार हो गया लेकिन बाद में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

अनिवार्य अपीलीय प्रक्रिया

फिरोजाबाद कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है, लेकिन दोषसिद्धि और सजा अभी अंतिम नहीं है। यह मामला अब अनिवार्य अपीलीय प्रक्रिया से गुजरेगा, जिससे कानून के तहत सजा को पूरी तरह से लागू करने से पहले आगे की कानूनी समीक्षा हो सकेगी।

क्यों मायने रखता है

यह मामला जघन्य अपराधों, खासकर बच्चों से जुड़े अपराधों में भारतीय न्यायपालिका की त्वरित न्याय की क्षमता को दर्शाता है, और त्वरित सुनवाई के लिए एक मिसाल कायम करता है।

मुख्य तथ्य

  • Convict's Name: Viraj, alias Jitendra Pathak
  • Victim's Age: 18 months
  • Incident Date: May 30
  • Trial Duration: 40 days
  • Charge Sheet Filed In: 6 days

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