छत्तीसगढ़ के स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाएं अनिवार्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र से सभी सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र सहित हिंदू प्रार्थनाएँ अनिवार्य कर दी हैं। सुबह की सभा में राष्ट्रगान और गीत के साथ ये प्रार्थनाएँ शामिल होंगी, जबकि समापन सत्र में राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ किया जाएगा। देशभक्ति और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई इस पहल की विपक्षी कांग्रेस ने आलोचना की है, जो इसे आरएसएस के एजेंडे को थोपने और संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन मानती है। कांग्रेस का तर्क है कि यह गैर-हिंदू छात्रों को अलग-थलग कर सकता है और भारत की विविध शैक्षिक परंपराओं को कमजोर कर सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय संस्कृति को आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करने पर जोर दिया।
AI सारांश
3 bulletsसरकारी स्कूलों में अनिवार्य प्रार्थनाएँ
छत्तीसगढ़ सरकार ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र से सभी सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र सहित हिंदू प्रार्थनाओं का पाठ अनिवार्य कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून को जारी यह निर्देश 16 जून, 2026 से प्रभावी है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करना है।
व्यापक प्रार्थना समय-सारणी
सुबह की सभा में अब राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनी के अंश शामिल होंगे। मध्याह्न भोजन के दौरान छात्र भोजन मंत्र का पाठ करेंगे। स्कूल का दिन राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के साथ समाप्त होगा, जिसमें दैनिक स्कूल जीवन के विभिन्न पहलू शामिल होंगे।
सरकार का तर्क और कार्यान्वयन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह पहल भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को समकालीन शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का घोषित लक्ष्य छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें गैर-अनुपालन करने वाले स्कूल प्रबंधन या प्राचार्यों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी दी गई है।
कांग्रेस ने की आलोचना
विपक्षी कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है और एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने इसे आरएसएस का एजेंडा थोपने का प्रयास बताया, यह तर्क देते हुए कि विशिष्ट धार्मिक मंत्रों को अनिवार्य करना अन्य धर्मों के छात्रों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। उन्होंने अन्य धार्मिक समुदायों से इसी तरह के समावेश की संभावित मांगों की चेतावनी दी।
धर्मनिरपेक्षता पर सवाल
कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका संविधान सभी धर्मों के लिए समान सम्मान की गारंटी देता है। उनका तर्क है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा किसी विशेष धर्म पर आधारित नहीं होनी चाहिए, यह उजागर करते हुए कि अनिवार्य हिंदू प्रार्थनाएं भारत के पारंपरिक समावेशी शैक्षिक दृष्टिकोण से भटकाव का कारण बन सकती हैं। इस कदम को सार्वजनिक शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने वाला माना जा रहा है।
क्यों मायने रखता है
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाओं का अनिवार्य होना शिक्षा में धर्मनिरपेक्षता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिससे धार्मिक समावेशन और सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।
मुख्य तथ्य
- •State: Chhattisgarh
- •Mandate Issued: June 12, 2026
- •Effective From: Current Academic Session (June 16, 2026)
- •Mandatory Prayers: Gayatri Mantra, Deep Mantra, Saraswati Vandana, Guru Mantra, Shanti Mantra, Bhojan Mantra
- •Government's Stated Goal: Foster patriotism, discipline, moral values, cultural awareness
- •Opposition's Stance: Imposition of RSS agenda, unconstitutional, violates secularism
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…