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पटना HC ने पुलिस हिरासत से लापता व्यक्ति के मामले में CBI जांच का आदेश दिया

Briovo· 09 Aug 2026, 05:22 pm IST
पटना HC ने पुलिस हिरासत से लापता व्यक्ति के मामले में CBI जांच का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के भोजपुर जिले में अगस्त 2025 में उत्पाद शुल्क पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद लापता हुए मनोज कुमार के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है। मनोज को कथित तौर पर शराब पीने के आरोप में पकड़ा गया था और परिवार से कॉल कटने से पहले उसे पुलिसकर्मियों द्वारा पीटने की खबर थी। पुलिस ने दावा किया था कि मनोज चलती गाड़ी से भाग गया था, जिसके बाद उसके पिता ने अदालत का रुख किया। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक पुलिस जांच को पक्षपातपूर्ण और जल्दबाजी रहित पाया, यह देखते हुए कि स्थानीय अधिकारी संदिग्ध थे और उन्होंने अपने बयान बदल दिए थे। सीबीआई को 11 सितंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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पटना HC ने CBI जांच का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के भोजपुर जिले में उत्पाद शुल्क पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद लापता हुए मनोज कुमार के मामले में सीबीआई जांच अनिवार्य कर दी है। अदालत का यह फैसला घटना के एक साल बाद आया है, जिसमें स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में पक्षपात और जल्दबाजी की कमी का हवाला दिया गया है। इस निर्देश का उद्देश्य मनोज की हिरासत से लापता होने के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।

लापता होने का विवरण

केंद्रित राजमिस्त्री मनोज कुमार को कथित तौर पर 13 अगस्त, 2025 को बिहार के बिहिया में एक काली मंदिर के पास शराब पीने के आरोप में उत्पाद शुल्क पुलिस ने हिरासत में लिया था। उसने कथित तौर पर अपने परिवार को दो बार फोन किया, पहले उन्हें अपनी गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया और फिर कहा कि उसे 'बेरहमी से पीटा जा रहा है' इससे पहले कि कॉल काट दी गई। उसकी मोटरसाइकिल बाद में लावारिस पाई गई, और उसे तब से नहीं देखा गया है।

पुलिस जांच पर कोर्ट के निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य जांच एजेंसी की जांच पक्षपातपूर्ण थी और उसमें जल्दबाजी की कमी थी। इसने नोट किया कि स्थानीय गवाहों से तुरंत पूछताछ नहीं की गई, महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं किया गया, और संदिग्धों से पूछताछ के लिए सार्थक कदम नहीं उठाए गए। अदालत ने यह भी उजागर किया कि उत्पाद शुल्क अधिकारियों, जो संदिग्ध थे, ने बार-बार अपने बयान बदले।

पुलिस का बयान और कोर्ट का खंडन

पुलिस ने दावा किया था कि मनोज ट्रांजिट के दौरान अपनी गाड़ी से कूद कर भाग गया था। हालांकि, अदालत ने इसे असंभव पाया, यह देखते हुए कि वाहन के दरवाजे बाहर से बंद थे, जिससे किसी के लिए भी उन्हें खोले बिना बाहर कूदना असंभव था। जांच में मनोज और उत्पाद शुल्क वाहन के निजी चालक के बीच हाथापाई का भी खुलासा हुआ।

संदिग्ध और आगे के निर्देश

उत्पाद शुल्क विभाग के एसआई धीरज कुमार, एएसआई राजू कुमार, कई होम गार्ड और ड्राइवर सहित, संदिग्धों के रूप में पहचान की गई है। अदालत ने सीबीआई को प्रतिष्ठित अधिकारियों की एक टीम बनाने का निर्देश दिया और उन्हें पिछली जांच में शामिल किसी भी पुलिस अधिकारी से पूछताछ करने का पूरा अधिकार दिया। सीबीआई को 11 सितंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

क्यों मायने रखता है

यह मामला पुलिस जवाबदेही और जांच की अखंडता के बारे में चिंताओं को उजागर करता है, खासकर जब कानून प्रवर्तन अधिकारी इसमें शामिल होते हैं। सीबीआई जांच हिरासत से एक नागरिक के लापता होने की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करती है।

मुख्य तथ्य

  • Incident Date: August 13, 2025
  • Disappeared Person: Sanoj Kumar
  • Detaining Agency: Excise Police, Bhojpur
  • Court Order Date: August 7 (year not specified, but likely 2024 given news date)
  • Investigating Agency: CBI
  • Next Hearing: September 11

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