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आसाराम को अंतरिम जमानत नहीं, मिला निजी केयरटेकर रखने का अधिकार

Briovo· 06 Aug 2026, 04:33 pm IST
आसाराम को अंतरिम जमानत नहीं, मिला निजी केयरटेकर रखने का अधिकार

नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं मिली। एम्स की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अदालत ने उनकी तत्काल रिहाई की आवश्यकता नहीं पाई। हालांकि, उनके स्वास्थ्य को देखते हुए, अदालत ने उन्हें 24 घंटे की देखभाल के लिए अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो वह नई परिस्थितियों के आधार पर दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट से मिली पिछली 20 दिन की पैरोल की जानकारी छिपाने पर भी नाराजगी व्यक्त की।

AI सारांश

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सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आसाराम की अंतरिम मेडिकल जमानत याचिका खारिज कर दी, जो नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। जस्टिस एम.एस. सुंदरेश और पी.बी. वराले की पीठ ने एम्स की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा के बाद निष्कर्ष निकाला कि उनकी तत्काल जेल से रिहाई की कोई आवश्यकता नहीं है।

24 घंटे देखभाल के लिए केयरटेकर की अनुमति

जमानत खारिज करने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को स्वीकार करते हुए उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी। यह केयरटेकर जेल परिसर के भीतर 24 घंटे सहायता प्रदान करेगा। कोर्ट ने जेल अधिकारियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।

स्वास्थ्य बिगड़ने पर दोबारा आवेदन का विकल्प

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को यह विकल्प दिया है कि यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो वे अंतरिम जमानत के लिए दोबारा आवेदन कर सकते हैं। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि गंभीर चिकित्सा आपात स्थितियों को नई परिस्थितियों के आधार पर एक नई याचिका के साथ संबोधित किया जा सके।

कोर्ट ने पैरोल की जानकारी छिपाने पर जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान, पीठ ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की जब यह सामने आया कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पहले दी गई 20 दिन की पैरोल के बारे में सुप्रीम कोर्ट को सूचित नहीं किया था। अदालत ने कानूनी कार्यवाही के दौरान सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा करने के महत्व पर जोर दिया।

हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

यह उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले ही 27 मई को जोधपुर की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले की पुष्टि की थी और सजा में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।

क्यों मायने रखता है

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मेडिकल आधार पर जमानत चाहने वाले दोषियों के लिए कानूनी प्रक्रिया को उजागर करता है और यह सुनिश्चित करता है कि न्याय और मानवीय चिंताओं दोनों को ध्यान में रखते हुए उच्च-प्रोफाइल मामलों को भी उचित परिश्रम के साथ संभाला जाए।

मुख्य तथ्य

  • Court Decision: Interim bail denied
  • Allowed Provision: 24-hour trained caretaker
  • Reason for Denial: AIIMS medical report showed no immediate need for release
  • Future Option: Can reapply for bail if health worsens
  • Court Observation: Displeasure over undisclosed 20-day parole

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