अमेरिका ने भारत पर लगाया 10% टैरिफ, सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई
अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं पर 10% से 12.5% तक नए टैरिफ लगाए हैं। भारत को 10% वाले निचले टैरिफ समूह में रखा गया है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह सेक्शन 301 के तहत एक प्रवर्तन कार्रवाई है और भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है। ये टैरिफ शुक्रवार से प्रभावी हुए हैं, और उन देशों को लक्षित करते हैं जिन्होंने कथित तौर पर जबरन श्रम से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करने में विफल रहे हैं। भारत को शुरुआती में उच्च टैरिफ के लिए नामित किया गया था, लेकिन श्रम मानकों पर चर्चा के बाद इसे 10% श्रेणी में शामिल किया गया।
AI सारांश
3 bullets60 अर्थव्यवस्थाओं पर अमेरिकी टैरिफ लागू
संयुक्त राज्य अमेरिका ने दुनिया भर की 60 अर्थव्यवस्थाओं पर 10% से 12.5% तक के नए टैरिफ लागू किए हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा घोषित यह उपाय, व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत लागू किया गया है। ये टैरिफ शुक्रवार, 24 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गए, और उन देशों को लक्षित करते हैं जो जबरन श्रम उत्पादों को पर्याप्त रूप से प्रतिबंधित नहीं कर रहे हैं।
भारत को निचले टैरिफ दायरे में रखा गया
भारत को 10% वाले निचले टैरिफ समूह में रखा गया है, जिसमें ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, मैक्सिको और बांग्लादेश सहित 16 अन्य अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। शुरुआत में, भारत को 12.5% उच्च टैरिफ के लिए माना जा रहा था। हालांकि, श्रम मानकों के संबंध में अमेरिका के साथ सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा के माध्यम से, भारत ने 10% की अधिक अनुकूल दर प्राप्त की।
विदेश मंत्रालय ने की धारा 301 प्रवर्तन की पुष्टि
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी फैसले को स्वीकार किया, यह स्पष्ट करते हुए कि यह धारा 301 के तहत एक प्रवर्तन कार्रवाई है, जो टैरिफ संबंधी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस मामले पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुका है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के उद्देश्य से बातचीत जारी है।
अमेरिकी टैरिफ निर्णय का आधार
अमेरिकी निर्णय यू.एस.टी.आर. द्वारा मार्च में धारा 301 (बी) के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ शुरू की गई जांच से उपजा है। टैरिफ मुख्य रूप से उन देशों को लक्षित करते हैं, जिन्होंने अमेरिका के अनुसार, 'जबरन श्रम' से बने उत्पादों के आयात को पर्याप्त रूप से प्रतिबंधित नहीं किया है। यू.एस.टी.आर. ने यह निर्णय लेने से पहले 45 से अधिक सरकारों से परामर्श किया, सार्वजनिक सुनवाई की और 1,600 से अधिक लिखित प्रस्तुतियों की समीक्षा की।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संबंध
अमेरिकी प्रशासन का यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें कुछ आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया गया था। नतीजतन, ट्रंप प्रशासन ने नए टैरिफ लागू करने और अपनी व्यापार नीति को आगे बढ़ाने के लिए धारा 301 के वैधानिक प्रावधानों का सहारा लिया। यह व्यापार बाधाओं को लागू करने के लिए कानूनी आधार में बदलाव को उजागर करता है।
क्यों मायने रखता है
सेक्शन 301 के तहत लगाए गए नए अमेरिकी टैरिफ से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और व्यापार संबंध प्रभावित हो सकते हैं। भारत ने बातचीत के जरिए कम टैरिफ दर हासिल की है, लेकिन वैश्विक व्यापार और चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत पर इसके व्यापक प्रभाव महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
मुख्य तथ्य
- •Tariff Range: 10% to 12.5%
- •Affected Economies: 60
- •India's Tariff: 10%
- •Effective Date: Friday (July 24, 2026)
- •Basis of Action: Section 301 of Trade Act, 1974
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