‘डिमिस्टिफाइंग साइबरसिक्योरिटी’ पुस्तक का विमोचन
डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे की नई किताब "डिमिस्टिफाइंग साइबरसिक्योरिटी" का नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सभागार में विमोचन किया गया। यह पुस्तक पाठकों के लिए जटिल साइबर सुरक्षा विषयों को सरल बनाने का लक्ष्य रखती है। सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशक बृजेश सिंह ने डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला, खासकर भारत के तेजी से बढ़ते इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार के साथ, जिसने जून 2025 में 1 अरब कनेक्शनों को पार कर लिया है। एनएसई के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने जोर दिया कि मोबाइल फोन एक नई डिजिटल सीमा बन गए हैं, जो महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा चुनौतियां पेश करते हैं। इस कार्यक्रम में "प्रौद्योगिकी से परे साइबर सुरक्षा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में नेतृत्व, सुदृढ़ता और विश्वास" विषय पर एक पैनल चर्चा भी हुई।
AI सारांश
3 bulletsपुस्तक विमोचन कार्यक्रम का विवरण
डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे द्वारा लिखित पुस्तक 'डिमिस्टिफाइंग साइबरसिक्योरिटी' का नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सभागार में आधिकारिक तौर पर विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह के साथ शुरू हुआ, जिसमें साइबर सुरक्षा के क्षेत्र के प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और विशेषज्ञ उपस्थित थे। यह विमोचन डिजिटल सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा
सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशक बृजेश सिंह ने वर्तमान डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डेटा संरक्षण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा और हर व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समाज के भीतर साइबर सुरक्षा मानसिकता विकसित करने को महत्वपूर्ण बताया।
मोबाइल फोन: एक नई डिजिटल सीमा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने बताया कि मोबाइल फोन एक नई डिजिटल सीमा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि ये उपकरण आज सबसे बड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं। चौहान ने भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें जून 2025 तक इंटरनेट कनेक्शन 1 अरब से अधिक हो गए थे, जो मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों की तात्कालिकता को दर्शाता है।
लेखक की दूरदर्शिता और AI की भूमिका
लेखक डॉ. दुर्गा प्रसाद दुबे ने बताया कि उनकी पुस्तक जटिल साइबर सुरक्षा अवधारणाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक पाठकों को मिथकों को समझने और साइबर सुरक्षा में भविष्य की चुनौतियों का अनुमान लगाने में मदद करेगी। बृजेश सिंह ने आगे कहा कि AI के युग में, मानवीय लेखन और अनुभवों का दस्तावेजीकरण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जिससे डिजिटल ज्ञान में सार्वजनिक योगदान को बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञ पैनल चर्चा
पुस्तक विमोचन के बाद, 'प्रौद्योगिकी से परे साइबर सुरक्षा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में नेतृत्व, सुदृढ़ता और विश्वास' विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत (सेवानिवृत्त) और ब्लूम्सबरी इंडिया पब्लिशिंग के मनीष खुराना जैसे प्रतिष्ठित मेहमानों ने अपने विचार साझा किए। इस चर्चा का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा के जटिल परिदृश्य को समझने के लिए उन्नत दृष्टिकोणों का पता लगाना था।
क्यों मायने रखता है
भारत की डिजिटल उपस्थिति तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में साइबर सुरक्षा को समझना हर व्यक्ति और राष्ट्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। यह पुस्तक और इसके इर्द-गिर्द की चर्चाएँ जागरूकता बढ़ाने और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक मानसिकता विकसित करने का लक्ष्य रखती हैं।
मुख्य तथ्य
- •Book Title: Demystifying Cybersecurity
- •Author: Dr. Durga Prasad Dubey
- •Launch Venue: National Stock Exchange (NSE) Auditorium
- •India Internet Connections (June…: 1 Billion
- •Key Speaker: Brijesh Singh, Principal Secretary and Director General of Information and Public Relations
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