महाराष्ट्र में 44 आंदोलन संबंधी मामले वापस होंगे
महाराष्ट्र की कैबिनेट उप-समिति ने धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से संबंधित 44 मुकदमों को वापस लेने की सिफारिश की है। इससे पहले 77 मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई थी। समिति ने 133 आवेदनो की समीक्षा की, यह दोहराते हुए कि महिलाओं के खिलाफ अपराध या नागरिक विवाद जैसे गंभीर अपराध पात्र नहीं हैं। मौजूदा/पूर्व विधायकों/सांसदों से जुड़े मामलों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की मंजूरी आवश्यक है। इस कदम का उद्देश्य गणेशोत्सव, दही हांडी, पशु संरक्षण और श्रम आंदोलनों जैसे आयोजनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को "अनावश्यक" मुकदमों से राहत दिलाना है।
AI सारांश
3 bulletsकैबिनेट उप-समिति ने वापसी को मंजूरी दी
महाराष्ट्र कैबिनेट उप-समिति, जिसकी अध्यक्षता सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार कर रहे हैं, ने राज्य सरकार को 44 मामले वापस लेने की सिफारिश की है। ये मामले महाराष्ट्र भर में विभिन्न धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए थे। यह निर्णय समिति को प्रस्तुत 133 आवेदनों की समीक्षा के बाद लिया गया है।
पिछली सिफारिशें और लंबित मामले
इस नवीनतम सिफारिश से पहले, समिति ने एक पिछली बैठक में 77 मामलों को वापस लेने का सुझाव दिया था। वर्तमान में, समिति के विचार के लिए केवल आठ मामले लंबित हैं। इसके अतिरिक्त, 14 मामलों को पुलिस उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली क्षेत्रीय समितियों द्वारा पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया गया है।
वापसी के लिए अयोग्य मामले
कैबिनेट उप-समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कुछ प्रकार के अपराध सरकार की नीति के तहत वापसी के लिए पात्र नहीं हैं। इनमें महिलाओं के खिलाफ अपराध, गंभीर आपराधिक अपराध और व्यक्तिगत या नागरिक विवाद शामिल हैं। मौजूदा और पूर्व विधायकों तथा सांसदों से जुड़े मामलों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट से अंतिम मंजूरी की भी आवश्यकता होती है।
मामले वापसी के पीछे का उद्देश्य
सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं, प्रदर्शनकारियों और वैचारिक आंदोलनों में भाग लेने वालों को उन "अनावश्यक मामलों" से राहत प्रदान करे, जिनका उन्होंने सामना किया है। इसका उद्देश्य उन्हें अनुचित अभियोजन से मुक्त करना है। वापस लिए गए मामलों में गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव, दही हांडी, पशु संरक्षण आंदोलन और श्रम आंदोलन जैसे विविध कार्यक्रम शामिल हैं।
क्यों मायने रखता है
इन मामलों को वापस लेने से विभिन्न आंदोलनों में शामिल कई व्यक्तियों को राहत मिलेगी, जिससे कानूनी प्रक्रियाएं सरल होंगी और न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम होगा।
मुख्य तथ्य
- •Cases Recommended for Withdrawal…: 44
- •Cases Recommended for Withdrawal…: 77
- •Total Applications Reviewed: 133
- •Cases Pending for Consideration: 8
- •Cases Recommended for…: 14
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