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यमुना घाटों पर सुरक्षा की अनदेखी, श्रद्धालुओं की जान जोखिम में

Briovo· 07 Jul 2026, 11:32 am IST
यमुना घाटों पर सुरक्षा की अनदेखी, श्रद्धालुओं की जान जोखिम में

दिल्ली में पल्ला से कालिंदी कुंज तक यमुना घाटों पर हजारों श्रद्धालु रोज आते हैं, लेकिन वहां बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं का अभाव है. चेतावनी बोर्ड, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू बोट या स्थायी गोताखोर जैसी कोई सुविधा मौजूद नहीं है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि अधिकारी केवल बड़ी दुर्घटनाओं के बाद ही हरकत में आते हैं. गोताखोरों ने पुष्टि की कि उन्हें अक्सर शव निकालने के लिए बुलाया जाता है, डूबने से रोकने के लिए नहीं. श्रद्धालु स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें गोताखोर, बचाव उपकरण, बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं, ताकि इन धार्मिक स्थलों पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

AI सारांश

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व्यापक सुरक्षा चूक

दिल्ली में पल्ला से कालिंदी कुंज तक यमुना घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी एक बड़ी चिंता का विषय है. हजारों श्रद्धालु रोज़ाना इन घाटों पर अनुष्ठानों और पवित्र स्नान के लिए आते हैं, फिर भी आवश्यक सुरक्षा बुनियादी ढाँचा स्पष्ट रूप से अनुपस्थित है.

महत्वपूर्ण सुविधाओं का अभाव

अधिकांश घाटों पर गहराई दर्शाने वाले चेतावनी बोर्ड, आसानी से उपलब्ध लाइफ जैकेट, कार्यरत बचाव नावें और स्थायी, प्रशिक्षित गोताखोरों की उपस्थिति जैसी मूलभूत सुरक्षा सुविधाओं का अभाव है. यह व्यवस्थागत लापरवाही श्रद्धालुओं को दुर्घटनाओं और डूबने की घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है.

घटना के बाद ही कार्रवाई

स्थानीय निवासियों और कार्यरत गोताखोरों ने एक चिंताजनक पैटर्न पर प्रकाश डाला है: अधिकारी और बचाव दल आमतौर पर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई करते हैं. गोताखोरों को अक्सर केवल शव निकालने के लिए फोन आते हैं, जो सुरक्षा के प्रति एक सक्रिय के बजाय प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है.

स्थायी सुरक्षा की सार्वजनिक मांग

समुदाय सभी प्रमुख घाटों पर व्यापक और स्थायी सुरक्षा उपायों की जोरदार मांग कर रहा है. इसमें स्थायी गोताखोरों की नियुक्ति, बचाव नौकाओं और लाइफ जैकेट का प्रावधान, मजबूत बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना, और निरंतर निगरानी के लिए 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी लागू करना शामिल है.

जवाबदेही और भविष्य की कार्रवाई

प्रत्येक दुखद घटना के बाद प्रशासनिक जवाबदेही के बारे में बार-बार सवाल उठते हैं, जिसके बाद बेहतर सुरक्षा के वादे किए जाते हैं. प्रमुख चिंता यह बनी हुई है कि क्या ये प्रतिबद्धताएँ अगली दुर्घटना से पहले पूरी होंगी, या क्या सिस्टम केवल और जानमाल के नुकसान के बाद ही जागेगा?

क्यों मायने रखता है

यमुना घाटों पर सुरक्षा उपायों की कमी हजारों श्रद्धालुओं को जोखिम में डाल रही है, जिससे रोके जा सकने वाली डूबने की घटनाएँ हो रही हैं और धार्मिक स्थलों पर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासनिक लापरवाही उजागर हो रही है.

मुख्य तथ्य

  • Location: Yamuna Ghats, Palla to Kalindi Kunj, Delhi
  • Daily Visitors: Thousands of devotees
  • Missing Safety Features: Warning boards, life jackets, rescue boats, permanent divers
  • Administrative Response: Action often taken only after major incidents
  • Community Demand: Permanent divers, rescue boats, barricades, warning boards, CCTV
  • Reported by: Naseem Ahmed, Zee News

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