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मीरवाइज़ ने PoK हत्याओं की जांच की मांग की, बातचीत का आग्रह किया

Briovo· 03 Aug 2026, 07:17 am IST

कश्मीर के प्रमुख मौलवी मीरवाइज़ उमर फारूक ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), विशेषकर रावलकोट में हुई हालिया हत्याओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जहां कथित तौर पर कम से कम 30 लोग मारे गए थे। उन्होंने पाकिस्तान से क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे एक नागरिक समाज समूह, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों के साथ ईमानदारी से बातचीत करने का आग्रह किया। मीरवाइज़ ने इस बात पर जोर दिया कि नियंत्रण रेखा (LoC) के दोनों पक्षों को जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए और उनके अधिकारों और गरिमा को सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने किसी भी वास्तविक जन आंदोलन में समावेशिता के महत्व पर भी प्रकाश डाला, कश्मीरी शरणार्थियों और प्रवासियों के अधिकारों की वकालत की।

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मीरवाइज़ ने PoK हत्याओं की जांच की मांग की

कश्मीर के प्रमुख मौलवी मीरवाइज़ उमर फारूक ने शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), विशेषकर रावलकोट में हुई हालिया हत्याओं की त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पार लगातार हो रही अशांति और दुखद जानमाल के नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। मीरवाइज़ ने क्षेत्र में जान गंवाने वालों के लिए विशेष प्रार्थनाएं भी कीं।

नागरिक समाज के साथ बातचीत का आग्रह

मीरवाइज़ ने पाकिस्तान सरकार से संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों के साथ ईमानदारी से बातचीत करने की अपील की, जो विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहा एक नागरिक समाज समूह है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी शांति और स्थिरता केवल संवाद, संवैधानिक निष्पक्षता और समाज के हर वर्ग के अधिकारों और गरिमा के सम्मान के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है। यह अपील PoK में क्रूर कार्रवाई की रिपोर्टों के बीच आई है।

जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों पर ध्यान

मीरवाइज़ उमर फारूक ने इस बात पर जोर दिया कि जबकि सरकारें क्षेत्रों का प्रशासन करती हैं, जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी मातृभूमि के सच्चे हितधारक बने हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि उनके भविष्य को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय में लोगों को केंद्र में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा के पार के लोग इतिहास, परिवार, संस्कृति और एक समान राज्य विषय पहचान से बंधे हुए एक ही हैं।

जन आंदोलन में समावेशिता

मीरवाइज़ ने एक समावेशी जन आंदोलन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक वर्ग के अधिकारों को आगे नहीं बढ़ा सकता, जबकि दूसरे के अधिकारों को कम कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पाकिस्तान में लगभग तीस लाख कश्मीरी शरणार्थियों और प्रवासियों के मतदान के अधिकार और संवैधानिक स्थिति राजनीतिक मोलभाव या बहिष्कार का विषय नहीं होनी चाहिए। उनके अधिकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के सामूहिक अधिकारों का एक अभिन्न अंग हैं।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के आरोप

रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि PoK में दो दिनों के भीतर कम से कम 30 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने रावलकोट में JAAC द्वारा आयोजित एक लंबे मार्च के प्रतिभागियों पर गोलियां चलाईं। इस घटना ने गहन और निष्पक्ष जांच की मांगों को और बढ़ा दिया है।

क्यों मायने रखता है

मीरवाइज़ के बयान PoK में बढ़ते तनाव और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं को उजागर करते हैं, जो मुख्यधारा की चर्चा में अक्सर अनदेखी की जाने वाली क्षेत्र में जवाबदेही और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित करते हैं।

मुख्य तथ्य

  • Incident Location: Pakistan Occupied Kashmir (PoK), specifically Rawalakot
  • Casualties Reported: At least 30 people killed, dozens injured
  • Date of Statement: Friday, July 31, 2026
  • Demanding Entity: Mirwaiz Umar Farooq, Kashmir chief cleric
  • Demands: Prompt, impartial, and transparent investigation; engagement with JAAC
  • Civil Society Group: Joint Awami Action Committee (JAAC)

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