कलकत्ता HC ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में बरकरार रखा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी की याचिका खारिज करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता के रूप में मान्यता देने के फैसले को बरकरार रखा है। ममता ने स्पीकर के इस फैसले को चुनौती दी थी और अपने वफादार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद पर देखना चाहती थीं। यह फैसला टीएमसी के भीतर चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल के बाद आया है, जहां ममता द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ एक अलग गुट बना लिया था। कोर्ट का यह निर्णय विधायी समर्थन के आधार पर ऋतब्रत बनर्जी को स्पीकर द्वारा दी गई मूल मान्यता को पुष्ट करता है।
AI सारांश
3 bulletsहाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले को बरकरार रखा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी को बड़ा झटका देते हुए विधानसभा अध्यक्ष के ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने के फैसले को बरकरार रखा। ममता ने इस फैसले को चुनौती दी थी और अपने करीबी शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद पर देखना चाहती थीं। कोर्ट के इस फैसले से उनकी याचिका खारिज हो गई है, जिससे मूल नियुक्ति वैध हो गई।
विवाद की जड़
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ममता बनर्जी ने चुनावी हार के बाद, स्पीकर को शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक नियुक्त करने के लिए एक पत्र भेजा। हालांकि, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा सहित कई विधायकों ने इस पत्र की वैधता पर सवाल उठाया, जिसमें जाली हस्ताक्षर और उचित प्रस्ताव की कमी का आरोप लगाया गया।
ऋतब्रत ने बनाया अलग गुट
उनके विरोध के जवाब में, ममता बनर्जी ने ऋतब्रत और संदीपन को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद, उन्होंने विधानसभा में एक अलग गुट बना लिया। ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के समर्थन का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष के पद का दावा किया, जिसे स्पीकर ने संख्या बल के आधार पर मान्यता दी।
ममता के लिए राजनीतिक संकट
यह उच्च न्यायालय का फैसला ममता बनर्जी के लिए कई राजनीतिक झटकों में से एक है, जो 4 मई को अपनी चुनावी हार के बाद से महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रही हैं। चुनाव परिणामों को उनकी शुरुआती अस्वीकृति और ईवीएम पर सवाल उठाने के बाद आंतरिक असंतोष और एक विद्रोही गुट का गठन हुआ, जिससे उनका राजनीतिक परिदृश्य और जटिल हो गया। यह घटना बढ़ते आंतरिक दरार पर प्रकाश डालती है।
क्यों मायने रखता है
यह फैसला ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है, जो हालिया चुनावी हार और आंतरिक पार्टी असंतोष के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति को और कमजोर करता है। यह ऋतब्रत बनर्जी की स्थिति को मजबूत करता है और टीएमसी के भीतर बढ़ते गुटबाजी को उजागर करता है।
मुख्य तथ्य
- •Court Decision: Calcutta High Court upheld Speaker's decision to recognize Ritabrata Banerjee as Leader of Opposition.
- •Challenger: Mamata Banerjee challenged the Speaker's decision.
- •Mamata's Preference: Mamata wanted Shobhandeb Chattopadhyay as Leader of Opposition.
- •Ritabrata's Support: Ritabrata Banerjee claimed support of 58 MLAs after forming a separate faction.
- •Party Turmoil: Ritabrata and Sandipan Saha were expelled from TMC before forming a new group.
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