केजरीवाल E-20 ईंधन नीति के विरोध में PM आवास तक करेंगे मार्च
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने E-20 पेट्रोल नीति के विरोध में 100 समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने की घोषणा की है। वह इस नीति के खिलाफ 2.33 लाख लोगों द्वारा हस्ताक्षरित एक ऑनलाइन याचिका सौंपेंगे। केजरीवाल का आरोप है कि E-20 नीति को जबरन लागू किया जा रहा है, जिससे वाहनों के माइलेज और तकनीकी समस्याएं हो रही हैं। उनका दावा है कि उन्होंने एक महीने पहले प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। केजरीवाल ने इस नीति को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इथेनॉल खरीदने के कथित दबाव से भी जोड़ा, हालांकि उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया।
AI सारांश
3 bulletsE-20 नीति के विरोध में मार्च की घोषणा
दिल्ली के मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास तक विरोध मार्च की घोषणा की है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य E-20 पेट्रोल नीति का विरोध करना है, जो गैसोलीन में 20% इथेनॉल के मिश्रण को अनिवार्य करती है। यह मार्च मंगलवार को AAP मुख्यालय से शुरू होगा।
2.33 लाख हस्ताक्षरों वाली ऑनलाइन याचिका
केजरीवाल E-20 ईंधन नीति का विरोध करने वाले 2.33 लाख लोगों के हस्ताक्षरों वाली एक ऑनलाइन याचिका ले जाएंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले इन चिंताओं पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
जबरन लागू करने और वाहन संबंधी समस्याओं के आरोप
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर E-20 पेट्रोल नीति को जबरन लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह नीति विभिन्न वाहनों में कम माइलेज और तकनीकी समस्याओं का कारण बन रही है, और सरकार सार्वजनिक चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।
अमेरिकी दबाव और इथेनॉल खरीद के दावे
केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि भारत में इथेनॉल को बढ़ावा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के कारण है। उन्होंने दावा किया कि भारत अगले पांच वर्षों में लगभग 20 अरब डॉलर का इथेनॉल खरीदेगा, हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किया।
जन भागीदारी और दमन के दावे
AAP प्रमुख ने E-20 के खिलाफ हाल ही में आयोजित एक टाउन हॉल बैठक की सफलता पर प्रकाश डाला, जिसे लगभग सात लाख ऑनलाइन दर्शकों ने देखा। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि E-20 के बारे में चिंताएं उठाने वाले व्यक्तियों, प्रभावशाली लोगों और सामग्री निर्माताओं को ट्रोल किया जा रहा है और FIRs के साथ डराया जा रहा है।
क्यों मायने रखता है
E-20 ईंधन नीति, जो पेट्रोल में इथेनॉल के उच्च मिश्रण को अनिवार्य करती है, एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो वाहनों के प्रदर्शन और उपभोक्ता लागत को प्रभावित कर रहा है। एक प्रमुख राजनीतिक नेता द्वारा किया गया यह विरोध प्रदर्शन इसके कार्यान्वयन और नागरिकों व ऑटोमोटिव उद्योग पर संभावित प्रभावों के संबंध में सार्वजनिक और राजनीतिक चिंताओं को उजागर करता है।
मुख्य तथ्य
- •Date of March: Tuesday (unspecified date in August 2026)
- •Participants: Arvind Kejriwal and 100 AAP supporters
- •Petition Signatures: 2.33 lakh people
- •Allegation 1: E-20 petrol forcibly implemented
- •Allegation 2: US pressure from Donald Trump regarding ethanol purchase
- •PM Meeting Request: No response for a meeting requested a month ago
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