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‘द वॉयस ऑफ हिंद रजब’ विवाद: फिल्म पर एजेंडा चलाने का आरोप

Briovo· 21 Jun 2026, 01:31 am IST

2024 में इजरायली गोलाबारी में फंसी गाजा की एक बच्ची की सच्ची कहानी पर आधारित नई फिल्म, 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब', ने भारत में सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। यह विवाद एक उपयोगकर्ता द्वारा मुंबईकरों को फिल्म न देखने के लिए आलोचना करने के बाद शुरू हुआ, जिससे गाजा से संबंधित एक विशिष्ट एजेंडे को बढ़ावा देने के आरोप लगे। हालांकि फिल्म \

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विवाद की पृष्ठभूमि

यह बहस सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद शुरू हुई, जिसमें मुंबईकरों को 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब' की स्क्रीनिंग में कम उपस्थिति के लिए आलोचना की गई थी। उपयोगकर्ता ने मुंबई जैसे शहर में केवल 10 लोगों द्वारा फिल्म देखे जाने पर निराशा व्यक्त की और इसे 'शर्मनाक' बताया। यह प्रारंभिक पोस्ट तेजी से सिनेमा के माध्यम से कथित एजेंडों को आगे बढ़ाने के बारे में एक व्यापक चर्चा में बदल गई।

फिल्म के बारे में: 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब'

फिल्म 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब' कथित तौर पर गाजा की एक युवा लड़की की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो 2024 में इजरायली गोलाबारी के बीच फंस गई थी। जबकि कथा एक वास्तविक दुखद घटना पर आधारित है, लेख भारतीय दर्शकों को ऐसी कहानी से न जुड़ने के लिए शर्मिंदा करने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाता है जिसका भारत से कोई सीधा संबंध नहीं है।

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया और 'एजेंडा' के आरोप

प्रारंभिक पोस्ट के बाद, कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने मूल पोस्टर पर 'विक्टिम कार्ड' खेलने और एक विशिष्ट एजेंडा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। टिप्पणियों ने सुझाव दिया कि कम दर्शक संख्या का कारण 'मुसलमानों के प्रति घृणा' या 'भारतीय पाखंड' था, जिससे विवाद और भड़क गया। लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि यह चर्चा कितनी तेजी से संवेदनशील सांप्रदायिक और राष्ट्रवादी आरोपों में बदल गई।

दर्शक प्रतिक्रिया बनाम प्रचार कथा

सोशल मीडिया पर प्रचार के बावजूद, फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर बहुत कम सफलता मिली है, कथित तौर पर इसे केवल कुछ ही लोगों ने देखा है। यहां तक कि जो लोग उपस्थित थे, उनमें से कई को फिल्म आकर्षक नहीं लगी। ऑनलाइन प्रचार और ठंडी दर्शक प्रतिक्रिया के बीच यह तीखा विरोधाभास एजेंडा-संचालित कथा और सार्वजनिक हित के बीच के डिस्कनेक्ट को रेखांकित करता है।

व्यापक संदर्भ: भारत में गाजा विरोध प्रदर्शन

लेख गाजा के समर्थन में भारत में 150 से 400 विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करके संदर्भ प्रदान करता है, जिसमें अनुमानित 2 से 5 लाख लोग शामिल थे। इसके बावजूद, फिल्म की दर्शकों को आकर्षित करने में असमर्थता बताती है कि इस मुद्दे के साथ सार्वजनिक जुड़ाव, हालांकि मौजूद है, स्वचालित रूप से एजेंडा-संचालित सिनेमाई उपक्रमों के लिए समर्थन में तब्दील नहीं होता है।

क्यों मायने रखता है

यह बहस इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे कुछ कथाएँ मीडिया के माध्यम से धकेली जाती हैं, संभवतः विशिष्ट एजेंडों के लिए संवेदनशील वैश्विक घटनाओं का फायदा उठाती हैं और बौद्धिक निष्पक्षता पर सवाल उठाती हैं। यह अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और उनके चित्रण के इर्द-गिर्द की चर्चाओं में प्रचलित चयनात्मक आक्रोश और पाखंड पर प्रकाश डालता है।

मुख्य तथ्य

  • Film Name: The Voice of Hind Rajab
  • Film Subject: True story of a Gazan child in Israeli shelling (2024)
  • Controversy Origin: Social media post criticizing low viewership in Mumbai
  • Alleged Agenda: Promoting a Gaza-related narrative
  • Public Reception: Very low footfall, mixed reviews among those who watched
  • Number of Gaza protests in India: 150-400 with 2-5 lakh participants (estimated)

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