Briovo

Article

RajasthanHaribhau BagdeMaharana PratapHistory

राज्यपाल बागडे ने धीर कंवर और कैकेयी की तुलना की

Briovo· 23 Jun 2026, 03:42 pm IST
राज्यपाल बागडे ने धीर कंवर और कैकेयी की तुलना की

सीकर के नीमकाथाना में श्री राम महायज्ञ में भाग लेते हुए राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने महाराणा प्रताप की सौतेली माँ धीर कंवर की तुलना रामायण की कैकेयी से की। बागडे ने कहा कि जिस प्रकार कैकेयी ने राजा दशरथ को प्रभावित किया था, उसी प्रकार धीर कंवर ने राजा उदय सिंह को महाराणा प्रताप के बजाय अपने बेटे जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के लिए प्रभावित किया था। इतिहासकारों ने इस घटना की पुष्टि की है, जिसे अक्सर "राजमहलों की क्रांति" कहा जाता है, जिसमें कहा गया है कि मेवाड़ के सरदारों ने अंततः महाराणा प्रताप को सिंहासन पर बैठाया। यह निर्णय सम्राट अकबर जैसे शत्रुओं से मेवाड़ की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण था।

AI सारांश

3 bullets

राज्यपाल का महायज्ञ में संबोधन

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सीकर के नीमकाथाना स्थित झड़ाया बालाजी धाम में आयोजित 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ में भाग लिया। अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने ऐतिहासिक शख्सियतों की तुलना करते हुए महाराणा प्रताप की सौतेली मां धीर कंवर की तुलना रामायण के पौराणिक पात्र कैकेयी से की।

धीर कंवर और कैकेयी की तुलना

राज्यपाल बागडे ने बताया कि जिस तरह अयोध्या में कैकेयी ने राजा दशरथ को प्रभावित किया था, उसी तरह धीर कंवर ने मेवाड़ के राजा उदय सिंह को प्रभावित किया। उन्होंने राजा को अपने बड़े बेटे महाराणा प्रताप को छोड़कर अपने बेटे जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के लिए मना लिया, यह निर्णय पारंपरिक मानदंडों के खिलाफ था।

'राजमहलों की क्रांति'

इतिहासकार डॉ. मनीष श्रीमाली ने इस घटना को 'राजमहलों की क्रांति' बताया, उन्होंने कहा कि राजा उदय सिंह ने धीर कंवर के प्रभाव में आकर गुपचुप तरीके से जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। उदय सिंह के निधन के बाद, जगमाल ने अपने पिता के अंतिम संस्कार की उपेक्षा करते हुए सिंहासन पर बैठने का प्रयास किया।

मेवाड़ के भविष्य के लिए सामंतों का हस्तक्षेप

इतिहासकार डॉ. सुदर्शन सिंह राठौड़ के अनुसार, चित्तौड़गढ़ के हाथ से निकल जाने और सम्राट अकबर के खतरे के कारण मेवाड़ एक बड़े संकट का सामना कर रहा था। सोनगरा मानसिंह अखैराजोत और रावत कृष्णदास जैसे प्रमुख सामंतों ने महाराणा प्रताप को मेवाड़ की रक्षा के लिए सबसे योग्य नेता के रूप में पहचाना।

प्रताप का राज्याभिषेक

सरदारों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि महाराणा प्रताप ही सही उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने जगमाल को सिंहासन से हटा दिया और प्रताप को, जो संघर्ष से बचने के लिए मेवाड़ छोड़ने पर विचार कर रहे थे, सिंहासन पर बैठाया। इस निर्णायक कार्रवाई ने मेवाड़ राज्य की स्थिरता और भविष्य सुनिश्चित किया।

क्यों मायने रखता है

यह ऐतिहासिक उपाख्यान राजपूत राज्यों के भीतर की राजनीतिक जटिलताओं और शक्ति संघर्षों पर प्रकाश डालता है, यह दर्शाता है कि कैसे प्रमुख हस्तियों और उनके निर्णयों ने इतिहास और नेतृत्व की दिशा को आकार दिया। यह परंपरा को बनाए रखने और सक्षम नेताओं के चयन में कुलीनों की भूमिका को भी प्रदर्शित करता है।

मुख्य तथ्य

  • Event Location: Jhadaya Balaji Dham, Neem ka Thana, Sikar
  • Governor's Name: Haribhau Bagde
  • Historical Figures Mentioned: Dhir Kanwar, Maharana Pratap, King Uday Singh, Jagmal, Kaikeyi
  • Historical Event Termed: Revolution of the Royal Palaces
  • Historians Quoted: Dr. Manish Shrimali, Dr. Sudarshan Singh Rathore

क्या यह मददगार था?

Reader pulse

0 votes
Test yourself

Generate a 5-question quiz from this article.

चर्चा

Discussion (0)

Loading…