नरेश मीणा की जमानत रद्द, गिरफ्तारी वारंट जारी
टोंक में एक विशेष एससी-एसटी अदालत ने पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी है। न्यायालय ने समरावता थप्पड़ कांड में जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। मीणा को 13 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। उनके ऊपर एक स्कूल की छत गिरने से संबंधित विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार होने का आरोप है, जिसे पुलिस ने उनकी जमानत शर्तों का उल्लंघन बताया था। हालांकि, मीणा का दावा है कि वह पीड़ितों के परिवारों से मिल रहे थे और उन्होंने जमानत रद्द होने के पीछे राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया है। उन पर मूल रूप से 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान एक एसडीएम को थप्पड़ मारने का आरोप था।
AI सारांश
3 bulletsजमानत रद्द, गिरफ्तारी वारंट जारी
टोंक स्थित एक विशेष एससी-एसटी अदालत ने समरावता थप्पड़ कांड से जुड़े मामले में पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी है। जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए, अदालत ने गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है, जिसके बाद पुलिस उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। यह निर्णय राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 13 जुलाई 2025 को मीणा को सशर्त जमानत दिए जाने के बाद आया है।
जमानत शर्त उल्लंघन का आरोप
जमानत रद्द होने का आधार नगरफोर्ट थाना पुलिस द्वारा विशेष लोक अभियोजक रामावतार सोनी के माध्यम से दायर एक आवेदन है। पुलिस ने तर्क दिया कि एक स्कूल की छत गिरने से छात्रों की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मीणा की गिरफ्तारी, उनके हाईकोर्ट जमानत की शर्तों का उल्लंघन थी। यह घटना और बाद में हुई गिरफ्तारी उनकी जमानत रद्द करने की मांग का मुख्य आधार थे।
मीणा ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप
नरेश मीणा ने अपनी जमानत शर्तों का उल्लंघन करने से दृढ़ता से इनकार किया है, उनका कहना है कि स्कूल दुर्घटना स्थल पर उनकी उपस्थिति पीड़ितों के परिवारों से मिलने के लिए थी। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे कार्य को जमानत का उल्लंघन मानना संविधान की भावना के खिलाफ है। मीणा ने आगे आरोप लगाया कि अदालत को गलत जानकारी देकर गुमराह किया गया था और उन्होंने सुझाव दिया कि पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दबाव, विशेष रूप से भाजपा के प्रभाव में है।
समरावता थप्पड़ कांड का घटनाक्रम
मूल 'समरावता थप्पड़ कांड' देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान 13 नवंबर 2024 का है। मतदान के दिन नरेश मीणा ने कथित तौर पर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। इस घटना के बाद उनके समर्थकों ने कथित तौर पर पुलिस पर पथराव किया, वाहनों में आग लगा दी और मीणा को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया।
बाद की गिरफ्तारी और कानूनी कार्यवाही
प्रारंभिक घटना के अगले दिन, 14 नवंबर को, एक बड़े पुलिस दल ने नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया। समरावता घटना के संबंध में 59 व्यक्तियों को भी मामले में नामजद किया गया था। मीणा को बाद में राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी और उन्हें टोंक जेल से रिहा कर दिया गया था, हालांकि हाल ही में उनकी जमानत रद्द कर दी गई है।
क्यों मायने रखता है
यह मामला एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा है और न्यायिक प्रक्रियाओं में कानूनी जवाबदेही और संभावित राजनीतिक प्रभाव के मुद्दों को उजागर करता है। कथित विरोध प्रदर्शन भागीदारी के कारण जमानत रद्द होने से सशर्त जमानत के दायरे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में सवाल उठते हैं।
मुख्य तथ्य
- •Case: Samravata Slap Case
- •Accused: Naresh Meena (former independent candidate)
- •Court: Special SC-ST Court, Tonk
- •High Court Bail Date: July 13, 2025
- •Original Incident: November 13, 2024 (Devli-Uniara by-election)
- •Violation Claim: Arrest during protest over school roof collapse
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