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घुसपैठियों को बसाने के लिए विदेशी फंडिंग: 5 राज्यों में ED के छापे

Briovo· 17 Jul 2026, 09:31 am IST
घुसपैठियों को बसाने के लिए विदेशी फंडिंग: 5 राज्यों में ED के छापे

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को अवैध रूप से बसाने वाले एक नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसे विदेशों से फंडिंग मिलने का संदेह है। ईडी ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में 13 ठिकानों पर छापे मारे, जिसमें ₹40 लाख नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त किए गए। इस नेटवर्क पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पुनर्वास की व्यवस्था करने का आरोप है और इसके आतंकी फंडिंग से संबंध होने की भी आशंका है। यह जांच यूपी एटीएस की प्राथमिकी पर आधारित है और ट्रस्टों व गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से हुए वित्तीय लेनदेन, विशेषकर घुसपैठियों के लिए छोटी, बार-बार की जाने वाली भुगतानों पर केंद्रित है।

AI सारांश

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ईडी ने घुसपैठिया नेटवर्क का किया भंडाफोड़

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जो कथित तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराने और बसाने में शामिल था। बताया गया है कि यह जटिल ऑपरेशन विदेशी स्रोतों से धन प्राप्त करता था ताकि इन व्यक्तियों के लिए जाली पहचान दस्तावेज बनाए जा सकें, परिवहन की व्यवस्था की जा सके और देश के विभिन्न हिस्सों में उनके लिए आजीविका सहायता स्थापित की जा सके।

बहु-राज्यीय छापे और जब्ती

एक बड़ी कार्रवाई में, ईडी ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित पांच राज्यों में फैले 13 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। इन अभियानों के दौरान, अधिकारियों ने महत्वपूर्ण संपत्ति जब्त की, जिसमें पश्चिम बंगाल के कालिकापुर में हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम से ₹40 लाख नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के शामिल हैं। ये छापे धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत किए गए थे।

आतंकी फंडिंग से जुड़े होने का संदेह

जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह अवैध नेटवर्क, जो अवैध अप्रवासन को सुविधाजनक बनाता है, आतंकी फंडिंग से भी जुड़ा हो सकता है। ईडी विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत विभिन्न ट्रस्टों और स्वैच्छिक संगठनों की गतिविधियों की जांच कर रही है, जिनके लेनदेन की इन गैरकानूनी प्रथाओं से संभावित संबंधों के लिए जांच की जा रही है। कुछ शैक्षणिक संस्थानों की संलिप्तता की भी जांच चल रही है।

वित्तीय अनियमितताओं पर ध्यान केंद्रित

ईडी ने पाया कि घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए अक्सर ₹6,000, ₹8,000 या ₹10,000 जैसी छोटी किश्तों में बड़ी रकम का कथित तौर पर लेनदेन किया गया था। जांच विशेष रूप से कई बैंक खातों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों और ट्रस्टों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कथित 'किराया खातों' से जुड़े जटिल वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित है। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि इन निधियों को अवैध गतिविधियों और व्यक्तियों का समर्थन करने के लिए कैसे प्रवाहित किया गया था।

मामला यूपी एटीएस से हुआ शुरू

2024 में दर्ज ईडी का मौजूदा मामला उत्तर प्रदेश आतंकवाद-विरोधी दस्ते (यूपी एटीएस) द्वारा दर्ज की गई प्रारंभिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) से उपजा है। एटीएस की प्राथमिकी एक संगठित गिरोह पर केंद्रित थी जिस पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में लाने, उनके लिए आधार, पैन और पासपोर्ट जैसे पहचान दस्तावेज बनाने, और उन्हें देश भर में बसाने में मदद करने का आरोप है।

क्यों मायने रखता है

यह जांच अवैध अप्रवासन, संभावित आतंकी वित्तपोषण और ऐसी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए धर्मार्थ संगठनों के दुरुपयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता को उजागर करती है।

मुख्य तथ्य

  • States Raided: 5 (UP, Delhi, West Bengal, Haryana, Maharashtra)
  • Locations Raided: 13
  • Cash Seized: ₹40 lakh
  • Gold Seized: 180 grams of gold coins
  • Investigation Focus: Foreign funding for Bangladeshi/Rohingya infiltrators
  • Origin of Case: UP ATS FIR

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