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नीति आयोग की 'रिइमेजिनिंग केयर' रिपोर्ट: भारत के देखभाल इकोसिस्टम का निर्माण

Briovo· 07 Aug 2026, 09:31 am IST
नीति आयोग की 'रिइमेजिनिंग केयर' रिपोर्ट: भारत के देखभाल इकोसिस्टम का निर्माण

नीति आयोग की "रिइमेजिनिंग केयर" रिपोर्ट भारत के देखभाल क्षेत्र को पेशेवर बनाने की रणनीति प्रस्तुत करती है। यह भारत को कुशल देखभालकर्ताओं के लिए एक वैश्विक केंद्र में बदलने हेतु नीतिगत सुधारों, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और प्रौद्योगिकी एकीकरण का प्रस्ताव करती है। रिपोर्ट में बढ़ती उम्र की आबादी को संबोधित करने, महिलाओं को सशक्त बनाने, रोजगार सृजित करने और दीर्घकालिक देखभाल सेवाओं में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है, जो विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के साथ संरेखित है। देखभाल अर्थव्यवस्था, जो वर्तमान में बड़े पैमाने पर अवैतनिक और महिला-प्रधान है, औपचारिककरण के माध्यम से समावेशी विकास और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की पेशकश करते हुए महत्वपूर्ण रूप से बढ़ने की क्षमता रखती है।

AI सारांश

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नीति आयोग का देखभाल संबंधी दृष्टिकोण

नीति आयोग ने "रिइमेजिनिंग केयर: विकसित भारत@2047 में देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाने की रणनीतियाँ" नामक एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट भारत में एक पेशेवर, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार देखभाल इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। इसका अंतिम लक्ष्य भारत को कुशल देखभालकर्ताओं के लिए एक वैश्विक नेता और केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जो घरेलू जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय मांगों दोनों को पूरा करेगा।

भारत के जनसांख्यिकीय बदलाव को संबोधित करना

भारत एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय बदलाव का अनुभव कर रहा है, जिसमें 2050 तक बुजुर्गों (60+) की आबादी 34.7 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह, 2.68 करोड़ दिव्यांग लोगों और पुरानी बीमारियों में वृद्धि के साथ, दीर्घकालिक और विशेष देखभाल की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। वर्तमान में, भारत की लगभग 10% आबादी पारिवारिक देखभालकर्ता हैं, जो बड़े पैमाने पर अप्रशिक्षित और अवैतनिक हैं, यह औपचारिक देखभाल प्रावधान में अंतर को उजागर करता है।

आर्थिक क्षमता और महिला सशक्तिकरण

देखभाल अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर प्रस्तुत करती है, जिसके 2023 में 29.62 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 72.31 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। यह क्षेत्र महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अवैतनिक देखभाल का बोझ disproportionately उठाती हैं। देखभाल कार्य को औपचारिक बनाने से यह बोझ कम हो सकता है, सम्मानजनक रोजगार पैदा हो सकता है और महिला श्रम बल की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे मौजूदा लैंगिक असमानताओं का समाधान होगा।

प्रमुख चुनौतियाँ और प्रस्तावित समाधान

भारत का देखभाल इकोसिस्टम नियामक अंतराल, व्यापक अवैतनिक देखभाल बोझ और मानकीकृत प्रशिक्षण की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करता है। नीति आयोग ने इस क्षेत्र को औपचारिक बनाने, मान्यता सुनिश्चित करने और शिकायतों का समाधान करने के लिए एक राष्ट्रीय देखभाल नीति और एक राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद (एनसीसी) का प्रस्ताव किया है। रिपोर्ट देखभालकर्ता गतिशीलता और कौशल विकास को बढ़ाने के लिए एनएसक्यूएफ-संरेखित प्रमाणीकरण, विशेष प्रशिक्षण और वैश्विक भागीदारी की भी वकालत करती है।

सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक सहायता को मजबूत करना

रिपोर्ट में असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के तहत देखभालकर्ताओं को स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा लाभों का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, यह मुद्रा और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से देखभाल उद्यमिता को बढ़ावा देने की वकालत करती है। एक मजबूत देखभाल इकोसिस्टम के लिए परिवारिक देखभालकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) द्वारा समर्थित सामुदायिक देखभाल पहलों को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।

क्यों मायने रखता है

भारत की तेजी से बढ़ती उम्र की आबादी और देखभालकर्ताओं की बढ़ती वैश्विक मांग एक औपचारिक देखभाल इकोसिस्टम को आवश्यक बनाती है। यह पहल महिलाओं के बड़े पैमाने पर अवैतनिक देखभाल कार्य को औपचारिक बनाकर उन्हें सशक्त कर सकती है, महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है, और भारत को वैश्विक देखभाल अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकती है, जो समावेशी विकास और विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण में योगदान करेगी।

मुख्य तथ्य

  • Elderly Population Projection (2050): 347 million (20.8% of population)
  • Global Health Worker Shortage (2030): 11 million
  • India's Care Services Market…: USD 72.31 billion
  • Women's Caregiving Participation…: 41%
  • Daily Caregiving Time (Women vs.…: 140 minutes vs. 74 minutes

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