भारत बनेगा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का रणनीतिक लीडर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए एक रणनीतिक लीडर बनना चाहता है। 'सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट 2026' में बोलते हुए, उन्होंने वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को अपरिहार्य बनाने का लक्ष्य बताया। वर्तमान में, भारत में 2,100 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं, जो 2.3 मिलियन लोगों को रोजगार देते हैं और सालाना लगभग 100 बिलियन डॉलर कमाते हैं। अब ध्यान लागत कम करने से हटकर नवाचार, उत्पाद विकास और रणनीतिक मजबूती पर केंद्रित है। सरकार एक अनुकूल नीतिगत माहौल बना रही है और 2026-27 के बजट में जीसीसी के विकास का समर्थन करने के उपाय शामिल हैं। सीतारमण ने उद्योगों से टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी जीसीसी विकसित करने में मदद करने का आग्रह किया।
AI सारांश
3 bulletsभारत की रणनीतिक जीसीसी महत्वाकांक्षा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट 2026 में भारत की वैश्विक स्तर पर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए एक रणनीतिक लीडर बनने की महत्वाकांक्षा व्यक्त की। इस दृष्टिकोण का लक्ष्य वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था के भीतर भारत की अपरिहार्य स्थिति को मजबूत करना है, जिससे इसकी आर्थिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिले। मंत्री ने केवल संख्या पर ध्यान केंद्रित करने से हटकर इन केंद्रों के भीतर नवाचार और रणनीतिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
तेजी से विकास और आर्थिक प्रभाव
भारत में जीसीसी प्रतिष्ठानों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है, जहां 2024 में प्रति सप्ताह एक खुलने की दर से बढ़कर वर्तमान में प्रतिदिन औसतन एक हो गई है। इस तेजी से विस्तार के कारण भारत दुनिया के आधे से अधिक जीसीसी का घर बन गया है, जिनकी कुल संख्या 2,100 से अधिक है। ये जीसीसी सामूहिक रूप से 2.3 मिलियन व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करते हैं और लगभग 100 बिलियन डॉलर का वार्षिक राजस्व उत्पन्न करते हैं, जो उनके महत्वपूर्ण आर्थिक योगदान को रेखांकित करता है।
नवाचार और रणनीति की ओर बदलाव
भारत की जीसीसी यात्रा का विकास केवल लागत-कटौती उपायों से हटकर अगली पीढ़ी के उत्पाद विकास और उन्नत तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने की ओर बदलाव को प्रदर्शित करता है। कंपनियां अब अपनी नवाचार क्षमताओं को बढ़ाने, अग्रणी अनुसंधान में संलग्न होने और अपनी रणनीतिक पहलों को मजबूत करने के लिए भारत में जीसीसी स्थापित कर रही हैं। यह बदलाव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है, खासकर यह देखते हुए कि फॉर्च्यून ग्लोबल 2000 कंपनियों में से लगभग दो-तिहाई ने अभी तक भारत में अपने जीसीसी स्थापित नहीं किए हैं।
टियर-2/3 शहरों को सशक्त बनाना
सीतारामन ने उद्योगपतियों से राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों को जीसीसी निवेश की अगली लहर के लिए तैयार करने का आग्रह किया। इस पहल का उद्देश्य इन केंद्रों के भौगोलिक विस्तार को व्यापक बनाना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कंपनियों को एआई एप्लिकेशन विकसित करने, पेटेंट प्राप्त करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जिसे प्रयोगशालाओं से प्रभावी ढंग से विपणन योग्य समाधानों में बदला जा सके।
सरकारी सहायता और भविष्य का दृष्टिकोण
भारत सरकार जीसीसी के विकास को सुविधाजनक बनाने, संचालन को सुव्यवस्थित करने और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से एक अनुकूल नीतिगत माहौल तैयार कर रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस क्षेत्र का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इन सरकारी प्रयासों के साथ, उद्योग का नवाचार की ओर बदलाव, भारत को विचार, पेटेंट, उत्पाद, एल्गोरिदम और प्लेटफार्मों के लिए एक अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है।
क्यों मायने रखता है
भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के केंद्र के रूप में बढ़ता प्रभुत्व वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है, जिससे नवाचार, रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
मुख्य तथ्य
- •Number of GCCs in India: Over 2,100
- •Direct Employment by GCCs: 2.3 million people
- •Annual Revenue of GCCs: Nearly $100 billion
- •GCCs opening rate (before 2024): One per week
- •GCCs opening rate (current): One per day
- •Fortune Global 2000 companies…: Approximately two-thirds
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