भीलवाड़ा के युवक ने AI से बनाया फर्जी री-नीट पेपर
भीलवाड़ा पुलिस ने आकाश चौधरी को AI और गूगल का उपयोग करके एक फर्जी री-नीट परीक्षा पेपर बनाने और बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने टेलीग्राम पर 'पेपर माफिया' नामक एक समूह बनाया, जिसमें 54 सदस्य थे, और सात छात्रों को यह फर्जी पेपर बेचकर लगभग ₹18,000 कमाए। उसका नाबालिग साथी, जो समूह का प्रबंधन करता था, भी पकड़ा गया है। एयर फोर्स में भर्ती होने की तैयारी कर रहा चौधरी पुलिस रिमांड पर है, और नीट पेपर लीक व रद्द होने की राष्ट्रीय चिंताओं के बीच इस चौंकाने वाली घटना की जांच जारी है।
AI सारांश
3 bulletsभीलवाड़ा में फर्जी री-नीट पेपर घोटाला उजागर
भीलवाड़ा पुलिस ने री-नीट परीक्षा के फर्जी पेपर बनाने और बेचने के एक चौंकाने वाले मामले का पर्दाफाश किया है। मुख्य आरोपी आकाश चौधरी को AI और गूगल का उपयोग करके फर्जी पेपर बनाने और उसे टेलीग्राम समूह के माध्यम से वितरित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह घटना पूरे देश में नीट परीक्षाओं की अखंडता को लेकर व्यापक चिंताओं के बीच सामने आई है।
AI-जनित पेपर और 'पेपर माफिया' समूह
आकाश चौधरी ने कथित तौर पर नीट अध्ययन सामग्री पर शोध करने के लिए गूगल का उपयोग किया और AI की सहायता से एकM धोखाधड़ी वाला परीक्षा पेपर तैयार किया। इसके बाद उसने 'पेपर माफिया' नामक एक टेलीग्राम समूह बनाया, जिसने 54 छात्रों को आकर्षित किया, जिनमें से कुछ राज्य के बाहर के भी थे, जिन्हें वह फर्जी पेपर बेचना चाहता था। उसकी महत्वाकांक्षा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उच्च दांव का फायदा उठाकर रातों-रात अमीर बनने की थी।
गिरफ्तारी और चल रही जांच
सूचना मिलने के बाद, भीलवाड़ा पुलिस ने गुरुवार रात पटेल नगर में आकाश चौधरी को गिरफ्तार किया। एक नाबालिग साथी, जिसने चौधरी को टेलीग्राम समूह का प्रबंधन करने और नए सदस्यों को जोड़ने में सहायता की थी, को भी हिरासत में लिया गया है। चौधरी वर्तमान में 22 जून तक पुलिस रिमांड पर है, और सदर पुलिस उपाधीक्षक नेमीचंद चौधरी के नेतृत्व में जांच इस घोटाले की सीमा का पता लगाने के लिए सक्रिय रूप से जारी है।
वित्तीय लाभ और वीपीएन का उपयोग
जांच से पता चला है कि चौधरी ने सात छात्रों को फर्जी पेपर बेचकर लगभग ₹18,000 कमाए। उसने प्रति पेपर ₹2,000 से ₹4,000 के बीच शुल्क लिया, जिसमें एक छात्र ने उच्चतम राशि का भुगतान किया। पहचान से बचने के लिए, चौधरी ने कथित तौर पर अपने टेलीग्राम समूह को संचालित करने के लिए यूएस सर्वर के साथ एक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग किया, यह मानते हुए कि यह उसकी पहचान छिपाएगा।
परिवार की प्रतिक्रिया और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
आकाश चौधरी का परिवार, जो 25 सालों से भीलवाड़ा में रह रहा है, ने सदमा और अविश्वास व्यक्त किया, और उसके कृत्यों को 'नादानी' करार दिया। उन्होंने जोर दिया कि वह एक मेधावी छात्र है जो एयर फोर्स में शामिल होने की इच्छा सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की सक्रिय रूप से तैयारी कर रहा है। पुलिस ने आरोपी से दो मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और नीट की नोटबुक बरामद की है, जिनका उपयोग चल रही जांच में सबूत के तौर पर किया जा रहा है।
क्यों मायने रखता है
यह घटना महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं जैसे नीट की अखंडता से समझौता करने के लिए AI जैसी तकनीक के दुरुपयोग को दर्शाती है। यह निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने तथा टेलीग्राम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से गलत सूचना और धोखाधड़ी के प्रसार को रोकने में अधिकारियों के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करती है। यह मामला इस बात की कड़ी याद दिलाता है कि व्यक्ति अब परीक्षा प्रणालियों में कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए परिष्कृत तरीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिसके लिए कड़े प्रतिवाद और बढ़ी हुई सतर्कता की आवश्यकता है।
मुख्य तथ्य
- •Accused: Akash Chaudhary (19), originally from Churu, residing in Bhilwara.
- •Modus Operandi: Used Google and AI to create fake Re-NEET paper, sold it via Telegram group 'Paper Mafia'.
- •Accomplice: A minor associate who managed the Telegram group.
- •Earnings: Approximately ₹18,000 from 7 students out of 54 group members.
- •Current Status: Akash Chaudhary on police remand until June 22; minor accomplice detained.
- •Investigation Officer: Sadar Deputy Superintendent of Police Nemichand Chaudhary.
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