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तेजपाल बरी मामला: गोवा सरकार की अपील पर सुनवाई शुरू

Briovo· 18 Jul 2026, 03:23 pm IST
तेजपाल बरी मामला: गोवा सरकार की अपील पर सुनवाई शुरू

पत्रकार तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। तेजपाल के बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ता के बयानों में कई विरोधाभास हैं और वे तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। उन्होंने होटल की लिफ्ट के अंदर हुई कथित घटना की तकनीकी व्यवहार्यता पर भी सवाल उठाए। हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि शिकायतकर्ता एक विश्वसनीय गवाह है। सुनवाई के दौरान अदालत ने होटल की सीसीटीवी फुटेज भी देखी। यह सुनवाई तीन दिनों तक चलेगी, जिसके बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है।

AI सारांश

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अंतिम सुनवाई का आगाज़

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर अंतिम सुनवाई शुरू कर दी है। गुरुवार से शुरू हुई यह कार्यवाही तीन दिनों तक चलने की उम्मीद है, जिसके बाद अदालत अपना फैसला सुरक्षित रख सकती है।

बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी

तरुण तेजपाल के मुख्य वकील आबाद पोंडा ने दलील दी कि शिकायतकर्ता के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास थे और वे तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते थे। उन्होंने विशेष रूप से प्रारंभिक शिकायत और बाद की अदालती गवाहियों के बीच विसंगतियों पर प्रकाश डाला, खासकर होटल की लिफ्ट के अंदर हुई कथित घटनाओं के संबंध में।

लिफ्ट की घटना जांच के दायरे में

बचाव पक्ष ने दलीलें पेश कीं कि होटल की लिफ्ट के अंदर हुई कथित घटना तकनीकी रूप से असंभव थी। विशेषज्ञ गवाही का हवाला देते हुए, पोंडा ने कहा कि एक आपातकालीन स्टॉप बटन लिफ्ट को निकटतम मंजिल पर रोक देगा और उसके दरवाजे खोल देगा, जबकि लगातार 'क्लोज डोर' बटन दबाने से भी किसी भी मंजिल पर पहुंचने पर दरवाजे खुल जाएंगे। यह शिकायतकर्ता के लगातार चलती लिफ्ट में फंसे होने के दावे के विपरीत था।

सीसीटीवी फुटेज की जांच

सुनवाई के दौरान, अदालत ने होटल की लिफ्ट से सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की जहां कथित घटना हुई थी। बचाव पक्ष ने आगे तर्क दिया कि उपलब्ध फुटेज शिकायतकर्ता के लिफ्ट में वापस खींचे जाने या तेजपाल के बाहर निकलने के बाद उसका पीछा करने के दावों का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने पहली मंजिल के लिए सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की अनुपस्थिति का भी उल्लेख किया, जिसे जांच अधिकारी ने स्वीकार किया था।

सरकार का रुख

महाधिवक्ता तुषार मेहता द्वारा प्रतिनिधित्व की गई गोवा सरकार ने लगातार यह बनाए रखा है कि शिकायतकर्ता एक विश्वसनीय गवाह है और लंबी जिरह के बावजूद उसके आरोप कमजोर नहीं हुए हैं। मेहता ने तर्क दिया कि निचली अदालत साक्ष्यों और गवाहियों का ठीक से मूल्यांकन करने में विफल रही, जिसके कारण तेजपाल को बरी किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब एक पूर्व महिला सहयोगी ने गोवा में 'तहलका' कार्यक्रम के दौरान तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। तेजपाल ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है। 2021 में, मापुसा सत्र अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था, इस फैसले को बाद में गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

क्यों मायने रखता है

इस हाई-प्रोफाइल मामले का परिणाम यौन उत्पीड़न के आरोपों और अदालत में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के मूल्यांकन से संबंधित कानूनी मिसालों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखेगा।

मुख्य तथ्य

  • Case: 2013 sexual assault allegations against Tarun Tejpal
  • Court: Bombay High Court, Goa Bench
  • Parties: Goa Government (appellant) vs. Tarun Tejpal (respondent)
  • Defense Argument: Contradictions in complainant's statements, technical impossibility of lift incident
  • Evidence Presented: CCTV footage of hotel lift, expert testimony on lift mechanics
  • Previous Verdict: Tejpal acquitted by Mapusa Sessions Court in 2021

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