टीएमसी ने 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर कीं
तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने के लिए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपीं। ये सांसद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा कर रहे हैं और एक अलग समूह के रूप में मान्यता मांग रहे हैं। बनर्जी ने तर्क दिया कि दसवीं अनुसूची के तहत, स्वेच्छा से पार्टी सदस्यता छोड़ने पर अयोग्यता होती है। टीएमसी ने जोर दिया कि विलय के लिए दो-तिहाई विधायकों की मंजूरी आवश्यक है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी ऐसी ही स्थिति है, जहां 64 बागी विधायकों ने एक अलग विधायी समूह बनाया है। संसद के मानसून सत्र से पहले अध्यक्ष इस मामले पर फैसला सुनाने वाले हैं।
AI सारांश
3 bulletsटीएमसी ने अयोग्यता याचिकाएं दायर कीं
तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने औपचारिक रूप से 20 अलग-अलग याचिकाएं प्रस्तुत करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इन याचिकाओं में बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है, जो कथित तौर पर पार्टी से अलग हो गए हैं। यह कदम तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़े आंतरिक विवाद के बीच आया है।
बागियों ने NCPI में विलय का दावा किया
बागी सांसदों का दावा है कि वे नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) नामक एक इकाई में विलय कर चुके हैं और लोकसभा के भीतर एक अलग समूह के रूप में मान्यता मांग रहे हैं। हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने इस नई पार्टी की वैधता पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि इसका नाम पहले कभी सुना नहीं गया था।
दसवीं अनुसूची और दलबदल विरोधी कानून
बनर्जी ने भारत के दलबदल विरोधी कानून, दसवीं अनुसूची की धारा 2 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जो सदस्य स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ते हैं, उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र राजनीतिक संकट में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख किया, जिसने स्पष्ट किया कि इस अनुसूची के तहत एक पार्टी के भीतर 'विभाजन' अब वैध बचाव नहीं है।
राज्य विधानसभा का समानांतर और आरोप
पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी इसी तरह का राजनीतिक उथल-पुथल चल रहा है, जहां 64 तृणमूल विधायकों ने एक अलग विधायी समूह बनाया है, इस निर्णय को अब कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि बागी सांसद ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के डर या वित्तीय प्रलोभनों से प्रभावित थे, उन पर संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
अध्यक्ष का निर्णय जल्द अपेक्षित
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले इन अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने की उम्मीद है। अध्यक्ष ने पहले ही तृणमूल कांग्रेस और बागी सांसदों दोनों से उनकी अलग बैठने की व्यवस्था और मान्यता की मांग के संबंध में दलीलें सुनी हैं।
क्यों मायने रखता है
ये अयोग्यता याचिकाएं तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते आंतरिक कलह को उजागर करती हैं और लोकसभा में पार्टी की ताकत को काफी बदल सकती हैं। अध्यक्ष का निर्णय ऐसी ही स्थितियों के लिए एक मिसाल कायम करेगा, जिससे भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के आधार पर दलबदल विरोधी कानूनों और राजनीतिक दलों की स्थिरता की व्याख्या प्रभावित होगी।
मुख्य तथ्य
- •Number of petitions filed: 20
- •Party rebels claim to have joined: Nationalist Citizens Party of India (NCPI)
- •Legal provision cited by TMC: Section 2 of the Tenth Schedule (Anti-defection law)
- •Rebel MPs seeking: Recognition as a separate group
- •Expected decision timeline: Before Monsoon Session of Parliament
- •Number of rebel MLAs in West Bengal…: 64
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