Briovo

Article

Mekedatu ProjectCauvery Water DisputeTamil NaduKarnataka

मेकेदातु बांध विवाद: सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद तमिलनाडु में सर्वदलीय…

Briovo· 06 Jul 2026, 05:29 am IST
मेकेदातु बांध विवाद: सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद तमिलनाडु में सर्वदलीय…

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर और गहरा गया है। कर्नाटक बेंगलुरु को पेयजल उपलब्ध कराने और बिजली पैदा करने के लिए बहुउद्देशीय जलाशय बनाना चाहता है, जबकि तमिलनाडु को डर है कि इससे उसके किसानों के लिए पानी का प्रवाह कम हो जाएगा और कृषि प्रभावित होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु की याचिका को समय से पहले बताकर खारिज कर दिया था। इसके बाद, बांध के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए तमिलनाडु में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, क्योंकि किसान संभावित पानी की कमी और कृषि घाटे को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। यह परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत पहले ₹5,912 करोड़ थी, अब ₹9,000 करोड़ होने का अनुमान है, और इसका लक्ष्य 67.16 टीएमसी पानी जमा करना है।

AI सारांश

3 bullets

मेकेदातु परियोजना का अवलोकन

मेकेदातु परियोजना, जिसका अर्थ 'बकरी की छलांग' है, कर्नाटक में कावेरी और अर्कावती नदियों के संगम पर प्रस्तावित है। कर्नाटक बेंगलुरु, रामनगर और आसपास के क्षेत्रों के लिए पेयजल के साथ-साथ 400 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने के लिए एक बहुउद्देशीय जलाशय बनाने की योजना बना रहा है। यह परियोजना, जिसकी प्रारंभिक लागत ₹5,912 करोड़ थी, अब बढ़कर लगभग ₹9,000 करोड़ हो गई है, जिसका लक्ष्य 67.16 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) पानी जमा करना है।

तमिलनाडु की चिंताएँ और विरोध

तमिलनाडु मेकेदातु परियोजना का कड़ा विरोध कर रहा है, इस डर से कि यह कावेरी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करेगा, जिससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र में उसके किसानों के लिए पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी। राज्य का तर्क है कि उसकी सहमति के बिना निर्माण कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले की भावना का उल्लंघन करता है, जिसने जल-बंटवारे के फार्मूलों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था। पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने पहले 2013 में प्रधान मंत्री को पत्र लिखकर परियोजना की मंजूरी को रोकने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और कानूनी घटनाक्रम

तमिलनाडु ने 2013 में मेकेदातु और शिवनासमुद्र परियोजनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, यह जोर देते हुए कि एक अंतरराज्यीय नदी पर ऐसे निर्माणों के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी की भागीदारी और सभी तटवर्ती राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने मेकेदातु परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया, इसे समय से पहले बताया। इस फैसले ने कर्नाटक के लिए अपनी संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के साथ आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है।

राजनीतिक परिणाम और सर्वदलीय बैठक की मांग

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेदातु परियोजना का विरोध करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने अब तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने का आह्वान किया है, राज्य सरकार की इस बात के लिए आलोचना की है कि उसने विधानसभा प्रस्ताव से परे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीएमके नेताओं ने कावेरी डेल्टा के किसानों के बीच बढ़ती चिंता पर जोर दिया और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से कर्नाटक के त्वरित बांध निर्माण प्रयासों के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए एक बैठक बुलाने का आग्रह किया।

किसानों की चिंताएँ और आर्थिक प्रभाव

कावेरी डेल्टा तमिलनाडु का कृषि हृदयस्थल है, जो सिंचाई के लिए नदी के पानी पर अत्यधिक निर्भर है। किसानों को डर है कि मेकेदातु बांध के कारण पानी के प्रवाह में कमी धान और अन्य महत्वपूर्ण फसलों की खेती को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है, जिससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से परियोजना को रोकने और लाखों किसानों के जल अधिकारों और आर्थिक कल्याण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने की अपील की है।

जारी राजनीतिक और अंतर-राज्यीय तनाव

मेकेदातु परियोजना एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है, जो राजनीतिक बयानबाजी और अंतर-राज्यीय तनावों को बढ़ावा दे रही है। जबकि कर्नाटक जोर देता है कि यह परियोजना उसके पेयजल और बिजली की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है, तमिलनाडु अपने विरोध में दृढ़ है। कर्नाटक में, विपक्षी नेताओं ने अपनी ही सरकार की आलोचना की है, पहले के विरोध मार्चों के बावजूद इस मुद्दे पर उसकी कथित चुप्पी पर सवाल उठाया है। आने वाले समय में इस विवाद में कानूनी और राजनीतिक गतिविधि बढ़ने की उम्मीद है।

क्यों मायने रखता है

मेकेदातु परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक महत्वपूर्ण विवाद का विषय है, जो कावेरी नदी के पानी पर निर्भर लाखों किसानों और शहरी आबादी को प्रभावित कर सकता है। क्षेत्रीय स्थिरता और कृषि आजीविका के लिए इसका समाधान महत्वपूर्ण है।

मुख्य तथ्य

  • Project Cost (Estimated): ₹9,000 crore
  • Storage Capacity: 67.16 TMC (Thousand Million Cubic feet)
  • Project Location: Ramanagara district, Karnataka
  • Primary Purpose: Drinking water for Bengaluru, power generation
  • Legal Status: SC dismissed TN's petition as premature
  • Initial Project Cost (2013): ₹5,912 crore

क्या यह मददगार था?

Reader pulse

0 votes
Test yourself

Generate a 5-question quiz from this article.

चर्चा

Discussion (0)

Loading…