मानसून ने भारत को बांटा: पूर्व में भारी बारिश, पश्चिम सूखा

इस मानसून सिज़न में भारत एक बड़े "क्लाइमेट डिवाइड" का सामना कर रहा है। जहाँ बंगाल की खाड़ी शाखा ने पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल और बिहार में समय से पहले और भारी वर्षा की है, वहीं अरब सागर शाखा रुक गई है। यह देरी अरब सागर पर कम दबाव वाले क्षेत्रों ("पावर बूस्टर") की अनुपस्थिति और शुष्क, नीचे की ओर बहने वाली हवाओं के कारण है, जो महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों तक नमी वाली मानसूनी हवाओं को पहुँचने से रोक रही हैं। मुंबई में आमतौर पर 11 जून तक मानसून आ जाता है, लेकिन अब इसके जून के अंत तक आने की उम्मीद है, और गुजरात में 20 जून तक प्री-मानसून और 23 जून तक मुख्य मानसून की उम्मीद है।
क्यों मायने रखता है
मानसून भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी असमान प्रगति कृषि योजना, पानी की उपलब्धता को प्रभावित करती है, और प्रभावित क्षेत्रों में सूखे का कारण बन सकती है, जो सीधे GS1 (भूगोल) और GS3 (अर्थव्यवस्था - कृषि) विषयों से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- •Monsoon arrival in Kerala: June 4
- •Typical monsoon arrival in Mumbai: June 11
- •Expected monsoon arrival in Mumbai: Late June
- •Expected pre-monsoon in Gujarat: June 20
- •Expected main monsoon in Gujarat: June 23
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